इसमें इस्राईल की सीमाओं का भी उल्लेख किया गया है। बैतुल मुक़द्दस के बारे में भी बात की गई है। फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों के भविष्य का मुद्दा भी शामिल किया गया है तथा शांति समझौते को सुनश्चित करने के लिए सुरक्षा प्रबंध को भी दृष्टिगत रखा गया है। उनका कहना है कि इस योजना में वार्ता का प्रस्ताव नहीं दिया गया है बल्कि समाधान पेश किए गए हैं।
अमरीकी थिंक टैंक ने अपनी वेबसाइट पर जो लेख प्रकाशित किया है वह डील आफ़ सेंचुरी के सूत्रधार और वाइट हाउस के विशेष सलाहकार जेयर्ड कुशनर से होने वाली लंबी बातचीत में मिलने वाली जानकारियों पर आधारित है। कुशनर का कहना है कि डील आफ़ सेंचुरी में इस्राईलियों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित किया गया है और फ़िलिस्तीनियों के लिए अच्छे जीवन का प्रावधान भी रखा गया है। अलबत्ता फ़िलिस्तीनियों की राजनैतिक आकांक्षाओं को नज़रअंदाज़ किया गया है। पूरी बातचीत में कुशनर ने एक बार भी फ़िलिस्तीनी सरकार का शब्द प्रयोग नहीं किया। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अमरीका फ़िलिस्तीनी राष्ट्र का नाम ही मिटा देने की चेष्टा में है। कुशनर की बातचीत में यह संकेत है कि फ़िलिस्तीनियों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए उनके इलाक़ों में निवेश बढ़ाया जाएगा। इस्राईल की सीमाओं को निर्धारित किया जाएगा।
कुशनर ने यह भी कहा कि ट्रम्प ने डील आफ़ सेंचुरी को पढ़ा नहीं है बल्कि उसके मुख्य बिंदुओं के बारे में अपने सलाहकारों से उन्होंने पूछ लिया है।
सैटलोफ़ का कहना है कि कुशनर की बातचीत से यह लगता है कि वह कूटनीतिज्ञ से अधिक रियल स्टेट के ब्रोकर लगते हैं जो अपने विशेष अंदाज़ में दशकों पुराने विवाद को हल कराने की कोशिश में हैं। उनकी एक मुख्य रणनीति यह है कि फ़िलिस्तीनियों की अपेक्षाओं को बहुत नीचे लाया जाए ताकि अमरीका की योजना के तहत उन्हें जो कुछ भी दे दिया जाए वही उन्हें बहुत ज़्यादा लगे।
कुशनर को यह एहसास ही नहीं है कि फ़िलिस्तीनियों और इस्राईलियों के बीव का मुद्दा ज़ीरो से शुरू नहीं हो रहा है बल्कि अतीत में बहुत सी बातों पर सहमति और वादे किए गए हैं। ओस्लो समझौते को 25 साल बीत चुके हैं इस बीच इस्राईल और फ़िलिस्तीनी प्रशासन के मध्य लगातार संपर्क रहा है।
सैटलोफ़ यह मानते हैं कि इस समय फ़िलिस्तीनियों और इस्राईलियों के बीच मतभेद बहुत अधिक बढ़ चुका है। विवाद इतना गहरा हो गया है कि उसे दूर कर पाना असंभव लगता है। इसलिए कुशनर और उनके सहयोगी जो कुछ भी कह और कर रहे हैं उसका कोई महत्व नहीं है क्योंकि फ़िलिस्तीन के हालात ही कुछ और हो गए हैं। अमरीका ने जो योजना तैयार की है उसे अमरीका के घटक भी कूटनीति के कूड़ेदान में डाल देंगे। कुशनर मित्र के रूप में इस्राईल के लिए जो मेहनत कर रहे हैं वह इस्राईल को फ़ायदा पहुंचाने के बजाए भारी नुक़सान पहुंचाएगी। इसलिए कि ज़मीनी हालात बदल चुके हैं। इस समय तो इस्राईल को अपना भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है तो एसे में इस तरह की बातें और शर्तेंश करना जो युद्ध जीत लेने के बाद विजेता पक्ष पेश करता है मूर्खता के अलावा कुछ नहीं है।